पश्चिम बंगाल में समुद्र में लापता ट्रॉलर बरामद, नौ मछुआरों के शव मिले, छह की तलाश जारी
बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी समेत सभी दल चुनाव प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं
कोलकाता। बालुरघाट दक्षिण दिनाजपुर जिले का जिला मुख्यालय है। अत्रेयी नदी है, जो इस शहर से होकर बहती है। बालुरघाट भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित है। यहां से भारत-बांग्लादेश की सीमा काफी नजदीक है। इस कारण गाय तस्करी, सोना तस्करी से लेकर अवैध घुसबैठ की समस्या इस जिले में है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बालुरघाट ने अहम भूमिका निभाई थी। साल1942 में अंग्रेजों के खिलाफ अगस्त आंदोलन या भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बालुरघाट के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था। साल 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत पश्चिम दिनाजपुर जिले में बिहार के कुछ हिस्सों को इसमें जोड़ा गया। 1 अप्रैल 1992 को जिले को फिर से उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर में विभाजित किया गया। बालुरघाट दक्षिण दिनाजपुर का मुख्यालय बन गया। बालुरघाट का इतिहास 'पालÓ और 'सेनÓ राजवंशों से मिलता है।
पुरातात्विक खुदाई के दौरान कुछ ऐसी चीजें मिलीं जिनसे साफ पता चलता है कि यह स्थान अतीत में अच्छी तरह से बसा हुआ था और अपनी संस्कृति और शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था। बालुरघाट उल्लेख प्राचीन पांडुलिपियों और शिलालेखों में भी मिलता है, यह जिला 'कोटिबारशाÓ नाम से प्रसिद्ध था और इसकी राजधानी देवकोट में थी, जो गंगारामपुर टाउन के पास है। स्थानीय तौर पर यह स्थान बाणगढ़ के नाम से जाना जाता था। सम्राट अशोक के समय के शिलालेख बड़ी संख्या में जिले की तत्कालीन राजधानी देवकोट से मिले हैं। 2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार, कुल 1979954 जनसंख्या में से 87.76' ग्रामीण और 12.24' शहरी आबादी है। कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात क्रमश: 28.33 और 15.19 है। 2021 की मतदाता सूची के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में 1506124 मतदाता और 2079 मतदान केंद्र हैं।
सात विधानसभा में 4 पर टीएमसी का कब्जा
बालुरघाट संसदीय सीट के अधीन सात विधानसभा क्षेत्र हैं। इटाहार, तपन, बालुरघाट, गंगारामपुर, कुशमंडी, हरिरामपुर, कुमारगंज बालुरघाट लोकसभा क्षेत्र में शामिल विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें चार विधानसभा सीटों पर टीएमसी का कब्जा है, जबकि तीन पर बीजेपी का कब्जा है। इटाहार में टीएमसी के मोसराफ हुसैन, कुशमंडी से टीएमसी की रेखा रॉय, कुमारगंज तोराफ से टीएमसी के हुसैन मंडल, बालुरघाट से बीजेपी के अशोक लाहिड़ी, तपन से बीजेपी के बुधराय, गंगारामपुर से बीजेपी के सत्येन्द्र नाथ रे और हरिरामपुर से टीएमसी के बिप्लब मित्रा विधायक हैं।
2014 और 2019 में बदला जीत का इतिहास
बालुरघाट संसदीय क्षेत्र पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर में स्थित है। यह संसदीय सीट कांग्रेस और रेवोल्यूशनरी सोस्लिस्ट पार्टी (आरएसपी) की गढ़ मानी जाती रही है। साल 1951 में इस सीट पर सबसे पहले कांग्रेस के सांसद सुशील रंजन चट्टोपाध्याय ने जीत हासिल की थी। साल 1977 में पहली बार इस सीट पर आरएसपी ने कब्जा जमाया और साल 2009 तक आरएसपी के कब्जे में रहा। साल 2014 में टीएमसी ने इस सीट पर जीत हासिल की, लेकिन साल 2019 में बीजेपी ने इस संसदीय क्षेत्र पर पहली बार जीत हासिल की और बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार विजयी रहे। बालुरघाट संसदीय सीट पर आरएसपी का गढ़ माना जाता था। साल 2011 में टीएमसी की सरकार बनने के पहले तक इस सीट पर लेफ्ट की घटक दल आरएसपी का कब्जा रहा था, लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस संसदीय सीट पर पहली बार टीएमसी को जीत मिली। टीएमसी की उम्मीदवार अर्पिता घोष को 409,641 वोट के साथ 38.53 फीसदी मत मिले।
उन्होंने आरएसपी बिमलेंदु सरकार को पराजित किया। बिमलेंदु सरकार 3,02,677 वोट के साथ 28.47 फीसदी मत मिले थे। बीजेपी के बिश्वप्रिया रॉयचौधरी को 2,23,014 वोट के साथ 20.98 फीसदी मत मिले। वहीं कांग्रेस के ओम प्रकाश मिश्रा को 80,715 वोट के साथ 7.59 फीसदी मत मिले, जबकि नोटा में 11,691 वोट मिले थे। इसके पहले साल 2009 के लोकसभा चुनाव में आरएसपी प्रशांत कुमार मजूमदार को 388,444 वोट के साथ 44.38 फीसदी मत मिले। टीएमसी के बिप्लब मित्रा को 383,339 वोट के साथ 43.79 फीसदी मत मिले। बीजेपी सुभाष चंद्र बर्मन को 59,741 वोट के साथ 6.82 फीसदी, बीएसपी के गोबिंदा हांसदा को 13,977 वोट के साथ 1.60 फीसदी मत मिले थे।
हाईवोल्टेज होगा मुकाबला
बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी समेत सभी दल चुनाव प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। बंगाल के बालुरघाट में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के सुकांत मजूमदार और तृणमूल कांग्रेस नेता बिप्लब मित्रा के बीच है। इस सीट पर वाममोर्चा के घटक दल आरएसपी ने कांग्रेस के साथ मिलकर अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा हैं जबकि आईएसएफ के उम्मीदवार ने बालुरघाट का मुकाबला रोचक बनाने में लगे हैं। बीजेपी ने मौजूदा सांसद सुकांत मजूमदार को मैदान में उतारा है।
सुकांत मजूमदार बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं और गौर बंगा विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर भी हैं। वही बंगाल के उपभोक्ता मामलों के मंत्री बिप्लब मित्रा को तृणमूल कांग्रेस ने मैदान में उतारा है।
मित्रा दक्षिण दिनाजपुर के दिग्गज पार्टी नेता हैं। वह लोकसभा चुनाव के बाद जून 2019 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। बाद में जुलाई 2020 में उन्होंने बीजेपी छोड़ दी और टीएमसी में वापस लौट आए और 2021 बंगाल विधानसभा चुनाव जीता और विधायक के रूप में चुने गए।
2019 का रिजल्ट
भाजपा : 5,39,317
तृणमूल : 5,06,024
माकपा : 72,990
कांग्रेस : 36,783
2021 का रिजल्ट
इटाहार : तृणमूल
कुशमंडी : तृणमूल
कुमारगंज : तृणमूल
हरिरामपुर : तृणमूल
बालूरघाट : भाजपा
तपन : भाजपा
गंगारामपुर : भाजपा
2024 के उम्मीदवार
तृणमूल : विप्लव मित्रा
भाजपा : सुकांत मजुमदार
माकपा : जयदेव सिद्धांता
आईएसएफ : डा. मोजेमल्ल हक
मतदान: 26 अप्रैल
मतदाता : 15,06,124
कुल बूथ : 2079